नमूना प्रमाण — भगवद्गीता 4.34
Documented change
Original (1972)
[1972 मैकमिलन संस्करण से यथावत् पाठ — मास्टर रिकॉर्ड से डाला जाएगा।]
— 1972 मैकमिलन संस्करण, पृष्ठ —
Revised (1983+)
[1983 संशोधित संस्करण से यथावत् पाठ — मास्टर रिकॉर्ड से डाला जाएगा।]
— 1983 संशोधित संस्करण, पृष्ठ —
इस श्लोक में प्रभुपाद का अनुवाद है कि कैसे सेवा, जिज्ञासा और शरणागति के माध्यम से प्रामाणिक आध्यात्मिक गुरु से संपर्क किया जाए। संशोधित शब्दावली एक उपवाक्य की लय को बदल देती है।
🔗 Permanent link to this change यह क्यों मायने रखता है
दो अनुच्छेदों का संदर्भ — समझाएँ कि क्या बदला गया है और पाठक अपनी प्रति के विरुद्ध इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने के लिए क्या कर सकता है।